रविवार, 15 मई 2011

राज्यपाल या केंद्रपाल ?

देश की आजादी से लेकर आज तक राज्यपाल के अधिकारों को लेकर सवाल उठते रहे हैं । सबसे बड़ा सवाल ये है कि राज्यपाल राज्य का प्रमुख है या केंद्र का ऐजेंट है ? ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि राज्यपाल केंद्र सरकार के इशारों पर काम करता है । ताजा मामला कर्नाटक का है जहां के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने केंद्र सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है । राज्यपाल का तर्क है कि येदियुरप्पा सरकार ने सदन में स्पीकर की शक्तियों का दुरुपयोग किया है । साथ ही शक्ति परीक्षण के दौरान भी संवैधानिक नियमों का दुरुपयोग किया है। राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि इस समय राज्य में राष्ट्रपति शासन ही सबसे अच्छी व्यवस्था होगी । वहीं येदियुरप्पा का कहना है कि राज्यपाल हंसराज भारद्वाज विपक्ष के इशारे पर राज्य सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं । येदियुरप्पा ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे । उऩका दावा है कि उऩके साथ २२४ विधायकों में १२० का समर्थन प्राप्त है । अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर येदियुरप्पा बहुमत का दावा कर रहे हैं तो राज्यपाल ने उनके दावे को परखा क्यों नहीं । क्या राज्यपाल हंसराज भारद्वाज येदियुरप्पा सरकार बर्खास्त करने की जल्दी में हैं ? अगर ऐसा हैं तो इसका मतलब है कि जिन नियमों के उल्लंघन का आरोप येदियुरप्पा पर रहे हैं । उन्हीं नियमों का तो वो भी उल्लंघन कर रहे हैं ? फिर किस अधिकार से वो खुद को सही और येदियुरप्पा की सरकार को गलत ठहरा रहे हैं । अगर उन्हें लगता है कि येदियुरप्पा सरकार कोई गलत काम कर रही है तो वो उसका जवाब मांगें । अगर येदियुरप्पा राज्यपाल को जवाब से संतुष्ट नहीं कर पाते हैं तो राज्यपाल चाहें तो वो येदियुरप्पा को चेतावनी दे सकते हैं ।अगर फिर भी येदियुरप्पा गलत कदम उठाते हैं तो वो येदियुरप्पा के खिलाफ सख्त कदम उठा सकते हैं । लेकिन अक्टूबर २०१० से लेकर आज तक ऐसा लग रहा है कि राज्यपाल किसी के इशारे पर हर हाल में येदियुरप्पा की सरकार को बरखास्त करना चाहते हैं । दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के ग्यारह विधायकों और चार निर्दलीय विधायकों की सदस्यता बहाल कर दी है । जिनमें से बीजेपी के दस विधायकों ने येदियुरप्पा सरकार का समर्थन कर दिया है , औऱ इस बात की सूचना उन्होंने राज्यपाल को भी देनी चाही, लेकिन राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने मिलने से ही इऩकार कर दिया । और विपक्ष की मांग पर आऩन-फानन में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश केंद्र सरकार से कर दी। गौरतलब है कि इससे पहले अक्टूबर २०१० में भी राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी । ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि राज्यपाल की भूमिका क्या हो ?

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